www.samruddharashtra.in

Breaking News
जिला पुनर्वास कार्यालय के सहायक अधिकारी नरेंद्र खांडेकर रिश्वत लेते गिरफ्तार, प्रकल्प पीड़ित प्रमाणपत्र की पुनर्समीक्षा के लिए मांगे 2 लाख चंद्रपुर में बारिश का ऑरेंज अलर्ट, स्कूलों को दी गयी छुट्टी, इराई डैम के 5 दरवाजें खोले गए नागपुर-पुणे वंदे भारत का 10 अगस्त से शुभारंभ, 12 घंटे से कम समय में पूर्ण होगा सफर चांदा फोर्ट स्टेशन के पास मालगाड़ी पटरी से उतरी, रेल यातायात प्रभावित, वैनगंगा एक्सप्रेस को बल्लारशाह में ही रोका गया. चंद्रपुर रेलवे स्टेशन बनेगा अब टर्मिनल, प्लेटफार्म की संख्या होगी 8, मुंबई, पुणे के लिए सीधी ट्रेनों का रास्ता आसान अवैध सावकारी के आरोप में अशोक ठक्कर समेत 8 के खिलाफ मामला दर्ज, सावकारी के बदले हड़पी लोगों की जमीन

Home » E-Paper » कपास खरीदी रोकेंगे जिनिंग संचालक, BIS कानून का विरोध, फैक्टरियां बंद करने की चेतावनी

कपास खरीदी रोकेंगे जिनिंग संचालक, BIS कानून का विरोध, फैक्टरियां बंद करने की चेतावनी

Chandrapur 25 अगस्त : कपास गांठें बनाना, प्रसंस्करण तथा व्यापार करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित करने के केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ जिले के जिनिंग एवं प्रेसिंग संचालक एकत्रित हुए हैं, उन्होंने बीआईएस कानून को रद्द करने की मांग को लेकर अपनी फैक्टरियां बंद रखने और कपास खरीदी नहीं करने का निर्णय लिया हैं. 

जिले में स्थित जिनिंग एवं प्रेसिंग के संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को स्थानीय एनडी होटल में हुई, जिसमें जिले के 35 संचालक उपस्थित थे.
विदर्भ कॉटन असोसिएशन तथा जिला जिनर्स असोसिएशन के संयक्त तत्वावधान में हुई इस बैठक में केंद्र सरकार के बीआईएस कानून के बारे में जानकारी दी गयी.
जिला असोसिएशन अध्यक्ष रामकिशोर सारडा ने बैठक में बताया कि, बीआईएस कानून के तहत अब जिनिंग मिलों के संचालकों पर कपास की गुणवत्ता कायम रखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली गई हैं. उन्होंने बताया कि, कपास एक ऐसा कृषि उत्पाद हैं जो सर्वत्र एक समान नहीं होता हैं. कपास की गुणवत्ता उस खेत की जमीन, बीज, खाद, जलवायु आदि पर निर्भर होती हैं. उन्होंने बताया कि, जिनिंग में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाला कपास कभी भी एक समान गुणवत्ता वाला नहीं रह सकता.
उन्होंने आगे बताया कि, बीआईएस कानून के तहत अगर जिनिंग संचालकों द्वारा कपास की गुणवत्ता कायम नहीं रखी गयी तो उनके खिलाफ 2 वर्ष की सजा या 2 लाख का जुर्माना अथवा दोनों सजा का प्रावधान किया गया हैं. उन्होंने कहा कि, जिस वक्त इस कानून को बनाया गया उस वक्त जिनिंग के संचालकों अथवा संगठनों को विश्वास में नहीं लिया गया था.

बैठक में जिनिंग संचालकों को बीआईएस कानून के अंतर्गत लाने का विरोध करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के आगामी प्रोसेसिंग टेंडर में कोई सम्मिलित नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि, वे इस अन्यायकारक कानून का हरसंभव विरोध करेंगे.

जरूरत पड़ने पर निजी कपास खरीदी रोक दी जाएगी. बैठक में असोसिएशन के सचिव प्रीतम कोचर समेत कई सदस्य तथा जिनिंग संचालक उपस्थित थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ट्रेंडिंग खबर

आपकी राय

Poll not found

today rashifal

Our Visitor

0 0 1 9 4 6
Total Users : 1946
Total views : 3808