Chandrapur 25 अगस्त : कपास गांठें बनाना, प्रसंस्करण तथा व्यापार करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित करने के केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ जिले के जिनिंग एवं प्रेसिंग संचालक एकत्रित हुए हैं, उन्होंने बीआईएस कानून को रद्द करने की मांग को लेकर अपनी फैक्टरियां बंद रखने और कपास खरीदी नहीं करने का निर्णय लिया हैं.
जिले में स्थित जिनिंग एवं प्रेसिंग के संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को स्थानीय एनडी होटल में हुई, जिसमें जिले के 35 संचालक उपस्थित थे.
विदर्भ कॉटन असोसिएशन तथा जिला जिनर्स असोसिएशन के संयक्त तत्वावधान में हुई इस बैठक में केंद्र सरकार के बीआईएस कानून के बारे में जानकारी दी गयी.
जिला असोसिएशन अध्यक्ष रामकिशोर सारडा ने बैठक में बताया कि, बीआईएस कानून के तहत अब जिनिंग मिलों के संचालकों पर कपास की गुणवत्ता कायम रखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली गई हैं. उन्होंने बताया कि, कपास एक ऐसा कृषि उत्पाद हैं जो सर्वत्र एक समान नहीं होता हैं. कपास की गुणवत्ता उस खेत की जमीन, बीज, खाद, जलवायु आदि पर निर्भर होती हैं. उन्होंने बताया कि, जिनिंग में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाला कपास कभी भी एक समान गुणवत्ता वाला नहीं रह सकता.
उन्होंने आगे बताया कि, बीआईएस कानून के तहत अगर जिनिंग संचालकों द्वारा कपास की गुणवत्ता कायम नहीं रखी गयी तो उनके खिलाफ 2 वर्ष की सजा या 2 लाख का जुर्माना अथवा दोनों सजा का प्रावधान किया गया हैं. उन्होंने कहा कि, जिस वक्त इस कानून को बनाया गया उस वक्त जिनिंग के संचालकों अथवा संगठनों को विश्वास में नहीं लिया गया था.
बैठक में जिनिंग संचालकों को बीआईएस कानून के अंतर्गत लाने का विरोध करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के आगामी प्रोसेसिंग टेंडर में कोई सम्मिलित नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि, वे इस अन्यायकारक कानून का हरसंभव विरोध करेंगे.
जरूरत पड़ने पर निजी कपास खरीदी रोक दी जाएगी. बैठक में असोसिएशन के सचिव प्रीतम कोचर समेत कई सदस्य तथा जिनिंग संचालक उपस्थित थे.



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