Nagpur 17 नवंबर : राज्यपाल रमेश बैस ने यहां चिंता जताते हुए कहा कि, भारतीय लोग बड़े पैमाने पर भारतीय नागरिकता छोड़ रहे है, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
राज्यपाल बैस यहां एनएडीटी में आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे. राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (एनएडीटी) में आयकर विभाग में शामिल होने वाले भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारियों के एक बैच के प्रेरण समारोह में भाग लेने वे नागपुर में आये थे.
राज्यपाल बैस ने आगे कहा कि, वर्ष 2018 में भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या 1.43 लाख थी, वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 2.25 लाख तक पहुंच गई. भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में प्रतिवर्ष हो रही यह वृद्धि हम सब के लिए चिंता का विषय है. यदि उच्च नेटवर्थ वाले नागरिक ऐसे ही भारतीय नागरिकता छोड़ते रहे तो इसका विपरीत परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था पर हो सकता है. क्योंकि यही लोग जो व्यवसायी या कारपोरेट धन पैदा करते है, और देश की अर्थव्यवस्था चलाने में योगदान देते है. उन्होंने सुझाया कि, हमें कर प्रश्कों और व्यापारियों के बीच अच्छे संबंध प्रस्थापित करने वाली प्रकिया विकसित करने की आवश्यकता है. उन्होंने कर संबंधी मुकदमों को कम करने की भी सलाह दी. उन्होंने कहा कि, ऐसे मुकदमों में निर्णय लगने में विलंब होता है और व्यापारियों का कीमती समय बर्बाद होता है.
गौरतलब है कि, यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आईआरएस सेवा में शामिल होने से पहले अधिकारियों को एनएडीटी में डेढ़ वर्ष का प्रशिक्षण पूर्ण करना होता है. भारतीय राजस्व सेवा के लिए चयनित अधिकारियों के प्रेरण समारोह में ही राज्यपाल बोल रहे थे.




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