Chandrapur 10 मई : जिले के सिंदेवाही वन परिक्षेत्र में बाघ के हमले में 3 महिलाओं की मौत हो गयी. एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हो गयी.
यह दर्दनाक और क्रोधजनक घटनाएं सिंदेवाही वन परिक्षेत्र में डोंगरगांव तथा राम (माल)के पास हुई. एक ही दिन आए एक ही वन क्षेत्र में हुई उक्त दोनों घटनाओं के कारण परिसर में शोक की और वन विभाग को लेकर असंतोष लहर देखी जा रही है.
पहली घटना सिंदेवाही वन परिक्षेत्र के तहत डोंगरगांव के पास चारगांव बड़गे के कंपार्टमेंट नंबर 252 में हुई. जिसमें वंदना विनायक गजभिये ( 50) की मौत हुई. चारगांव बड़गे निवासी यह महिला सुबह 9 बजे तेंदू पत्ता इकट्ठा करने जंगल की ओर गई थीं, इसी समय घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया. वन्दनकी चीखें सुनकर आसपास मौजूद अन्य महिलाएं और पुरुष मदद के लिए दौड़े. लोगों की आवाज सुनकर बाघ जंगल की ओर भाग गया, लेकिन हमले में वंदना गंभीर रूप से घायल हो गई. घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और जांच की. घायल वंदना को इलाज के लिए सिंदेवाही के ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इस बीच, इसी वन क्षेत्र के राम (माल) वन क्षेत्र में एक और हृदय विदारक घटना सामने आई. शुभांगी मनोज चौधरी (38), कांताबाई बुधा चौधरी (60) और रेखा शालिक शेंडे (48), सभी मेंढा माल निवासी महिलाएं अन्य महिलाओं और पुरुषों के साथ तेंदू पत्ता इकट्ठा करने के लिए गांव के पास जंगल में गए थे. दोपहर बाद भी जब वह घर नहीं लौटा तो परिजनों व ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की. खोजबीन के दौरान डोंगरगांव बीट कक्ष क्रमांक 1355 के मेंढा माल चक जंगल क्षेत्र में तीनों महिलाएं मृत पाई गईं. नागरिकों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी. वन विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे, जांच शुरू की और तीनों महिलाओं के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिंदेवाही के ग्रामीण अस्पताल भेज दिया. मरने वाली तीन महिलाओं में एक ही परिवार की सास और बहू शामिल हैं. इस घटना से गांव में हाहाकार मच गया है.
उक्त दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की खबर तपरिसर में फैलते ही सिंदेवाही के ग्रामीण अस्पताल के बाहर नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई. जिससे वहां तनाव की स्थिति निर्माण हुई.
इन घटनाओं से सिंदेवाही वन क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल पैदा हो गया है, तथा तेंदू पत्ता इकट्ठा करने गए अन्य नागरिकों में भी दहशत फैल गई है. वन विभाग ने भी इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और ग्रामीणों को तेंदूपत्ता संकलन के लिए अकेले जंगल मे नहीं जाने की सलाह दी है.



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