Chandrapur 4 जुलाई : ताड़ाली एमआईडीसी में चल रहे धारीवाल कंपनी के निजी पावर प्लांट से हो रहे प्रदूषण की उच्चस्तरीय जांच कमेटी द्वारा जांच करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है. इसके लिए एक जांच कमेटी गठित की गई है, जो 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने वाली है.
राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने यह जानकारी विधानसभा के मानसून सत्र में चर्चा के दौरान दी.
वरोरा की विधायक प्रतिभा धानोरकर ने इस संदर्भ में एक प्रश्न उपस्थित किया तंग, उसके जवाब में सामंत ने उपरोक्त जानकारी देते हुए बताया कि, चंद्रपुर के धारीवाल पावर प्लांट से हो रहे प्रदूषण तथा इस कंपनी के खिलाफ प्राप्त शिकायतों के आधार पर इस कंपनी की जांच हेतु एक कमेटी का गठन किया गया है. अगर जांच में कंपनी दोषी पाए जाती है, तो कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि, महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल के ताडाली स्थित जमीन पर धारीवाल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के नाम से एक बिजली उद्योग है. 600 मेगावाट क्षमता वाले इस प्लांट से बिजली का उत्पादन लिया जा रहा है.
विधायक धानोरकर ने आरोप लगाते हुए कहा कि, इस प्लांट में पुरानी मशीनरी की सहायता से उत्पादन लिया जा रहा है, जिससे प्रदूषण हो रहा है. यह प्लांट वर्धा नदी से पानी की चोरी कर रहा है. प्लांट से बाहर निकलने वाली राख आसपास के किसानों के फसल को क्षति पहुंचा रही है. जिसका कोई मुआवजा किसानों को नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि, इस कंपनी के कारण यातायात भी अवरुद्ध हो रहा है, जिससे बार बार दुर्घटनाएं हो रही है. उन्होंने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की.
उन्होंने सभागार में आगे बताया कि, पिछले दिनों दिवंगत सांसद बालू धानोरकर ने भी कंपनी के खिलाफ आंदोलन किया था. पावर प्लांट के कार्यप्रणाली की कई त्रुटियां सामने आयी थी, इसके सचित्र प्रमाण मौजूद है. इस संदर्भ में जिलाधिकारी के समक्ष में हुई बैठक में भी कंपनी ने स्वीकार किया था कि, प्रदूषण से कई किसानों को नुकसान पहुंच रहा है.
धानोरकर ने आगे कहा कि, यह प्लांट पूर्णतः गैरकानूनी ढंग से कार्यान्वित है. कंपनी ने जलसंग्रहण के लिए जो रिजर्वायर बनाया है वह भी सदोषपूर्ण है. इस रिजर्वायर से साल भर पानी रिसता रहता है, इससे भी आसपास के खेतों में फसल प्रभावित हो रही है. इसकी भी कोई क्षतिपूर्ति किसानों को नहीं मिल रही है.
उन्होंने यह भी बताया कि, इस बिजलीघर के लिए पानी की आपूर्ति वढा गांव से ली जा रही है, इसके लिए नदी में कंपनी ने इंटेक वेल बनाई है, जो नियमों के अधीन नहीं है. कंपनी ने नदी के प्राकृतिक जलप्रवाह से भी छेड़छाड़ की है. जिससे आसपास के कई गांवों में जलसंकट की समस्या निर्माण हुई है.



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