Chandrapur 2 अक्टूबर : शराबबंदी हटने के बाद जिले में सर्वत्र धड़ल्ले से शुरू हुए बार एंड रेस्टोरेंट में से 20 प्रतिशत की आर्थिक स्थिति 2 वर्ष के भीतर ही कमजोर हो गयी है. यह बार रेस्टोरेंट अब संकट के दौर से गुजर रहे है. इस बीच राज्य सरकार ने 1 नवंबर से बार में परोसे जाने वाली शराब पर लगने वाले वैट को दोगुना कर देने से पहले ही संकट की मार झेल रहे जिले के बार एवं रेस्टोरेंट और भी मुश्किलों में घिर गए है, ऐसी स्थिति में संकट के दौर से गुजर रहे जिले के कुछ बार रेस्टोरेंट को आने वाले दिनों में ताले लगने की संभावना जताई जा रही है.
गौरतलब है कि, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के बार एवं रेस्टोरेंट में परोसे जाने वाली शराब पर लगने वाला वैट 5 प्रतिशत से अब 10 प्रतिशत कर दिया है. जिससे शराब का शौक रखने वालों को अब 1 नवंबर से क्लब, बार या लाउंज में शराब पीने पर ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. उल्लेखनीय है कि, बार एवं रेस्टोरेंट में वैसे भी ग्राहकों से शराब की एमआरपी से कई गुना अधिक की कीमत वसूली जाती है, इस पर सरकार का या आबकारी विभाग का कोई नियंत्रण नहीं होता है.
चंद्रपुर जिले में वर्ष 2015 से 2021 तक शराबबंदी लागू थी, इस दौरान बंदी के बावजूद भी जिले में धड़ल्ले से शराब आती रही थी और उसका बड़े पैमाने पर सेवन भी जारी था. शराबबंदी के दौरान लोगों को बार के अभाव में घरों में ही शराब पीने की आदत हो चुकी थी. यही वजह है कि, जिले के अधिकांश बार रेस्टोरेंट ग्राहकों के अभाव में वीरान नजर आते है, कुछ चुनिंदा ही बार रेस्टोरेंट में ग्राहकों की भीड़ दिखाई पड़ती है. शराब बिक्री में बड़े पैमाने में कमाई होती है, इस विचारधारा के तहत जिले में कई व्यवसाइयों ने बड़ा पूंजी निवेश करते हुए जगह जगह बार रेस्टोरेंट खोल दिये. लेकिन अब वे अपने निर्णय पर पछताने लगे है.
शराबबंदी हटने के बाद से जिले में अब तक कुल 407 बार एवं रेस्टोरेंट शुरू हो चुके है, जिनमें से सिर्फ 80 प्रतिशत की ही कारोबारी स्थिति अच्छी मानी जा रही है, जबकि शेष 20 प्रतिशत बार एवं रेस्टोरेंट आर्थिक संकट की स्थिति से गुजर रहे है. बताया जाता है कि, इनमें से कई बार रेस्टोरेंट अगले वित्तीय वर्ष में लाइसेंस के रिन्युअल करने की स्थिति में भी नहीं है. रिन्युअल के अभाव में भी जिले के कई बार रेस्टोरेंट को अप्रैल 2024 से ताले लग सकते है. आबकारी विभाग ने जिले में पिछले 2 वर्ष में अब तक शराब बिक्री के कुल 733 लाइसेंस आवंटित हो चुके है, जिनमें 407 परमिट रूम, देसी शराब की 108 दुकानें, 158 बियर शॉपी, देसी, विदेशी शराब बिक्री की 18 दुकानें, 2 क्लब लाइसेंस आदि का प्रमुखता से समावेश है.
जिले में देसी शराब की खपत प्रतिमाह 15 लाख बल्क लीटर की है, जबकि विदेशी शराब की खपत 4.5 लाख लीटर और बियर की खपत प्रतिमाह 6 लाख लीटर है. शराबबंदी वाले गडचिरोली जिले की सीमा पर स्थित बार रेस्टोरेंट की खपत आश्चर्यजनक रूप से बढ़ी हुई है, अन्य स्थानों पर कारोबारी स्थिति चिंताजनक है. राज्य में बार में परोसी जाने वाली शराब पर वैट अब 10 प्रतिशत किये जाने से पहले से ही खस्ताहाल जिले के अधिकांश बार रेस्टोरेंट और अधिक मुश्किलों में घिरने का अनुमान है.



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