Chandrapur 13 नवंबर : वायु प्रदूषण की रोकथाम हेतु सर्वोच्च न्यायलय तथा स्थानीय प्रशासन के दिशानिर्देशों के बावजूद जिले में लक्ष्मीपूजन की रात जमकर पटाखें फूटे फलस्वरूप जिले में वायु प्रदूषण की मात्रा 267 के करीब पहुंच गई थी. 
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अनुसार चंद्रपुर जिले में रविवार 12 नवंबर को रात 8 से 10 बजे के करीब वायु गुणवत्ता सूचकांक 270 के करीब पहुंच गया था, जिसे स्वास्थ्य के लिए घातक समझा जाता है. यही वायु गुणवत्ता सूचकांक दिनभर 200 से नीचे था. 250 के लेवल पर आम लोगों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. 
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक अगर 0 से 50 के बीच हो तो उसे स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्छा समझा जाता है. यह सूचकांक 51 से 100 के करीब संतुलित तो 101 से 150 तक संवेदनशील समूह के लिए अस्वास्थ्यकारी समझा जाता है. वायु की इस गुणवत्ता अवस्था मे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं तथा हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए श्वसन संबंधी समस्याओं के साथ ही आंख, त्वचा और गले मे जलन जैसी शिकायतों का खतरा होता है. यही सूचकांक अगर 151 से 200 हो तो वह और भी तकलीफदेह समझा जाता है. वायु सूचकांक 201 से 300 के बीच हो तो उसे बेहद अस्वास्थ्यकर माना जाता है.
यह भी उल्लेखनीय है कि, चंद्रपुर जिला वायु प्रदूषण के मामले में देश के चुनिंदा सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल रहता है. इस जिले के चंद्रपुर शहर, घुग्घुस, बल्लारपुर जैसे परिसर अन्य के मुकाबले बेहद प्रदूषित समझे जाते है. इस क्षेत्रों में स्थित बड़े उद्योग तथा कोयला खदानों के कारण सदैव वायु गुणवत्ता सूचकांक घातक श्रेणियों में ही शुमार होता है. दीवाली त्यौहार के दौरान बड़े पैमाने पर पटाखें जलाए जाने से इस वायु प्रदूषण में और अधिक इजाफा देखा जाता है.




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