Chandrapur 14 मार्च : आगामी लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र की सीटों से लड़ने वाले भाजपा प्रत्याशियों की सूची में चंद्रपुर संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी के रूप में घोषित जिले के पालकमंत्री सुधीर मुनगंटीवार कहीं उनके खिलाफ सक्रिय एक लॉबी द्वारा रचे गए साजिश के शिकार तो नहीं हुए है ? यह सवाल अब इस क्षेत्र के लोगों के जेहन में उठ रहा है.
लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा ना होते हुए भी मुनगंटीवार के सिर पर लोकसभा प्रत्याशी का सेहरा बांधा गया है. जिसमें मुनगंटीवार के खिलाफ महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा में सक्रिय एक लॉबी पूर्णतः सफल रही है. ऐसी आशंका जताई जा रही है. राज्य में प्रतिदिन भारी पड़ रहे एक कद्दावर नेता को दिल्ली की राजनीति में भेजने की कहीं यह साजिश तो न थी, जिसमें आखिरकार मुनगंटीवार फंस गए. यह भी सवाल उपस्थित किया जा रहा है.
ज्ञात रहे कि, महाराष्ट्र की राजनीति में सुधीर मुनगंटीवार का नाम पिछले कुछ वर्षों से तेजी से आगे आया था. कुशाग्रबुद्धि, चातुर्य, दूरदृष्टि और विकास कार्यो के लिए जी जान से मेहनत करने जैसे गुणों के कारण मुनगंटीवार का नाम महाराष्ट्र की राजनीति में अग्रणी था. उनके कार्य का अंदाजा महाराष्ट्र की जनता को उसी वक्त आया था, जब उन्हें महाराष्ट्र के वित्तमंत्री पद पर काम करने का मौका मिला था. महाराष्ट्र विधानसभा में लगातार 6 बार निर्वाचित मुनगंटीवार इस कदर आगे बढ़ रहे थे कि उन्हें महाराष्ट्र के भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखा जाने लगा था. और कहा जा रहा है कि, शायद यही बात उन्हीं की पार्टी में शीर्ष पदों पर विराजमान कुछ नेताओं को खटक रही थी. वे नहीं चाहते थे कि, मुनगंटीवार अब महाराष्ट्र की राजनीति में और कायम रहते हुए आगे बढ़ते चले जाएं. उन्हें किसी तरह दिल्ली की ओर रवाना करने के प्रयासों में यह लॉबी सक्रिय हुई थी, और इनमें यह लॉबी आखिरकार सफल भी रही है.
उल्लेखनीय है कि, मुनगंटीवार ने अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत लोकसभा प्रत्याशी के रूप में ही की थी, किंतु वे लगातार 2 बार लोकसभा चुनावों में विफल रहे थे. इस विफलता के बाद मुनगंटीवार ने लोकसभा चुनाव लड़ने का रास्ता त्यागते हुए विधानसभा चुनाव का रास्ता अपनाया था. वर्ष 1995 में वे विधानसभा चुनाव में पहली बार निर्वाचित रहे, तबसे उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, वे शुरु में चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र से विजयी होते गए, यह क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने पर उन्होंने बल्लारपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना शुरु किया, यहां से भी वे विजयी होते रहे. विधानसभा चुनावों में लगातार 6 बार जीत हासिल करने का कीर्तिमान उनके नाम है.
चंद्रपुर संसदीय क्षेत्र में वर्ष 2019 में भाजपा प्रत्याशी हंसराज अहीर की पराजय के बाद से ही इस सीट पर अबकी बार सुधीर मुनगंटीवार को पार्टी के आग्रह पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है, ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही थी, हालांकि मुनगंटीवार को लोकसभा लड़ने की इच्छा कतई नहीं थी, यह बात उन्होंने कई बार मंच पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की थी. भाजपा के लोकसभा प्रत्याशियों की दूसरी सूची घोषित होने के एक दिन पूर्व ही विसापुर में हुए एक समारोह में भी मुनगंटीवार ने राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सामने लोकसभा चुनाव लड़ने की अपनी अनिच्छा प्रदर्शित की थी.मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री शिंदे से यह तक कह डाला था कि, उन्हें भय और चिंता है कि, कहीं उन्हें पार्टी लोकसभा का प्रत्याशी घोषित न कर दे, उन्होंने मुख्यमंत्री शिंदे से यह गुजारिश तक की थी कि,मुख्यमंत्री शिंदे उनके लिए भाजपा पार्टी आलाकमान से बात करें और लोकसभा चुनाव लड़ने के उनके भय से उन्हें मुक्ति दिलाएं. लेकिन दूसरे ही दिन भाजपा ने अपने लोकसभा प्रत्याशियों की दूसरी सूची घोषित कर दी, जिसमें चंद्रपुर क्षेत्र से मुनगंटीवार का नाम शामिल था.
यह भी बता दें कि,लोकसभा के पिछले (2019) के चुनाव में देश में सर्वत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की लहर बरकरार थी, इसके बावजूद चंद्रपुर से भाजपा के कद्दावर नेता हंसराज अहीर को कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश धानोरकर के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था. समूचे महाराष्ट्र में कांग्रेस को यहीं से धानोरकर की जीत के रूप में एकमात्र सीट हासिल हुई थी. अहीर की इस हार के लिए उन दिनों मुनगंटीवार की असहकारिता को जिम्मेदार बताया जा रहा था. स्वयं अहीर भी यह आरोप सार्वजनिक तौर पर अप्रत्यक्ष रूप से कई बार लगा चुके है. तबसे अहीर और मुनगंटीवार के बीच उतने बेहतर संबंध नहीं है. यह भी बता दें कि, चंद्रपुर के स्थानीय विधायक किशोर जोरगेवार भले ही निर्दलीय चुनाव जीते हो, लेकिन वे फिलहाल राज्य में सत्तारूढ़ महायुति के ही एक समर्थित विधायक है. वे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के तथा राष्ट्रवादी के अजित पवार के भी उतने ही करीबी माने जाते है. भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के भी जोरगेवार बेहद करीबी है. मगर स्थानीय स्तर पर मुनगंटीवार और जोरगेवार के बीच संबंध उतने मधुर नहीं है. ऐसी ही स्थिति मुनगंटीवार और फडणवीस के बीच भी बताई जाती है. भाजपा की स्थानीय वरिष्ठ नेता तथा शोभा फडणवीस और मुनगंटीवार के बीच भी मधुरता बेहद कम है. चिमूर क्षेत्र के भाजपा विधायक बंटी भाँगड़िया के साथ भी मुनगंटीवार के संबंध उतने सही नहीं है. ऐसे में मुनगंटीवार को लोकसभा चुनाव में अपने क्षेत्र की इन सारी विरोधी ताकतों का सामना कर अग्निपरीक्षा को सामने जाना लगभग तय है.



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