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मंत्रालय का फर्जी आईडी दिखाकर 29 लाख की धोखाधड़ी, मंत्रालय में एक केबिन के सामने लगाई फर्जी नेम प्लेट भी दिखाई.

Chandrapur 31 मार्च : मुंबई मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग में अधीक्षक होने का बताकर मंत्रालय का फर्जी परिचय पत्र दिखाकर 29 लाख रुपये लूटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है.
इस संदर्भ में दुर्गापुर पुलिस ने 8 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. आरोपियों में स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षक के पीए समेत मुंबई मंत्रालय के एक परिचर का समावेश है. इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने मुंबई मंत्रालय में एक केबिन का भी प्रयोग किया तथा केबिन के सामने लगी फर्जी नेम प्लेट दिखाकर धोखाधड़ी को अंजाम दिया.
इस मामले में जिनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है, उनमें नागपुर निवासी शिल्पा बसंतकुमार उर्फ वसंतराव उदापुरे, उसके पति बसंतकुमार उर्फ वसंतकुमार उदापुरे, लॉरेन्स मरीदास हेनरी, दुर्गापुर निवासी जॉन मरीदास हेनरी, मुंबई निवासी स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षक के पीए नितिन साठे, मुंबई मंत्रालय में परिचर के तौर पर कार्यरत सचिन डोलस तथा घुग्घुस निवासी राकेश आत्राम और प्रकाश आत्राम का समावेश है.
यह कार्रवाई दुर्गापुर स्थित शक्तिनगर कॉलोनी निवासी सौरभ डोलीराम भुते तथा उनके मित्र पलाश शंकर दहिवड़े द्वारा दी गयी शिकायत के बाद की गयी है.
उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि, वे दोनों नौकरी की तलाश में थे, ऐसे में आरोपियों में से एक राकेश आत्राम ने दोनों को सरकारी नौकरी लगाने में मदद का भरोसा दिलाया इस काम मे उनका मित्र प्रकाश आत्राम मदद कर सकता है. प्रकाश का मित्र लॉरेन्स हेनरी की पत्नी शिल्पा बसंतकुमार उर्फ वसंतराव उदापुरे यह मुंबई मंत्रालय में स्वास्थ्य अधीक्षक के पद पर कार्यरत होने की बात उन्होंने बताई. और उनके ससुर बसंतकुमार उर्फ वसंतराव उदापुरे से भी उनकी घनिष्ठता होने का उन्होंने स्पष्ट किया.
शिकायतकर्ताओं ने आगे बताया कि, उन्होंने मानेवाड़ा नागपुर में जब उदापुरे के कार्यालय में बैठक ली. तब उन्होंने अपनी पुत्री शिल्पा का फर्जी पहचान पत्र दिखाया. उनके हस्ताक्षर के कुछ लेटर्स दिखाए. जिन पर स्वास्थ्य विभाग अधीक्षक, मंत्रालय मुद्रित था. उसपर मंत्रालय का स्टाम्प और हस्ताक्षर भी था.
बसंतराव ने उन्हें भरोसा दिलाया कि, दोनों को किसी भी जिले में स्वास्थ्य विभाग के किसी भी कार्यालयों में लिपिक अथवा टाइपिस्ट की नौकरी दिलाई जा सकती है. इसके एवज में उन्होंने दोनों से क्रमशः 15-15 लाख रुपये मांगे. इस बीच टोकन मनी के तौर पर दोनों ने क्रमशः एक-एक लाख रुपये दिए.
इस बीच दोनों से उनके शैक्षिक योग्यता तथा अन्य डॉक्यूमेंट लिए गए, तथा कुछ दिन बाद शिल्पा उदापुरे से उनकी नौकरी के बारे में नित्यरूप से फोन पर बात भी हो रही थी. इसी बीच एक दिन शिल्पा ने उन्हें फोन करके बताया कि, उन्हें लातूर के सरकारी अस्पताल में नियुक्ति दी जा रही है. उन्होंने लॉरेन्स के एक बैंक खाते में एक-एक लाख पुनः जमा करने का बताया. दोनों ने कुल 2 लाख पुनः जमा किये.
उल्लेखनीय है कि, इसके बाद शिकायतकर्ता लातूर के सरकारी अस्पताल में पहुंचे तो उन्हें अस्पताल में एक केबिन में बिठाया गया.जहां उन्हें बसंतकुमार और लॉरेन्स ने उनका नियुक्ति पत्र दिखाकर मेडिकल हेतु पुनः 3-3 लाख देने का आग्रह किया. दोनों ने मिलकर कुल 5 लाख उन्हें अदा किए.
कुछ दिनों बाद भी जब नौकरी का नियुक्ति पत्र हाथ नहीं आया तब शिकायतकर्ता ने उनसे इस बारे में पूछताछ की, तो आरोपियों ने उन्हें जवाब दिया कि, किसी वजह से वह नियुक्ति रद्द हुई है, उन्हें अब चंद्रपुर और गड़चिरोली जिला अस्पताल में नियुक्ति दी जा रही है. उनसे पुनः 2-2 लाख मांगे गए. इस तरह से समय समय पर दोनों से रकम ली गयी. किंतु कोई नियुक्ति पत्र हाथ नहीं आ सका.
काफी दिनों की प्रतीक्षा के बाद जब शिकायतकर्ता मुंबई मंत्रालय में पहुंचे, मंत्रालय के गेट पर ही खड़े बसंतकुमार, लॉरेन्स, जॉन हेनरी और नितिन साठे उन्हें साथ लेकर मंत्रालय की चौथी मंजिल पर लेकर गए. वहां एक केबिन के बाहर शिल्पा उदापुरे, अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग इस आशय की नेम प्लेट लगी हुई थी. केबिन के भीतर कोई महिला अधिकारी बैठी थी, जिसके गले मे अधीक्षक का आईडी कार्ड लटक रहा था. उस महिला अधिकारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि, तुम दोनों की सरकारी नौकरी तय की गई है, तुम्हे शेष तय रकम अभी जमा करनी है.
रकम जमा करने के बाद आरोपियों ने दोनों को मुंबई मंत्रालय में ही सामान्य प्रशासन विभाग के नियुक्ति पत्र सौंपे, उन्हें उनके परिचय पत्र भी सौंपे गए. अपने नियुक्ति स्थान पर कल से जॉइन करने की बात भी कही गयी. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि, दूसरे दिन जब वे दिए गए परिचय पत्र के आधार पर मंत्रालय पहुंचे और चौथे माले पर उस कार्यालय के सामने पहुंचे तो वहां से शिल्पा उदापुरे नामक नेम प्लेट नदारद थी.सबको कॉल लगाने का प्रयास किया पर किसी ने कॉल नहीं उठाए, तब उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि, उनके साथ 29 लाख रुपयों की धोखाधड़ी हुई है.

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